Wednesday, August 22, 2012

कुलदीप नैयर का एक लेख आज दैनिकजागरण में प्रकाशित हुआ जिस में उन्होने लिखा है 'सेना के तीनो अंगों के अधिकारियों के रिटायर होने के पांच साल तक राजनीति में हिस्सा लेने पर रोक लगा देनी चाहिये | इन पांच सालों मे सेना से जुडे होने के कारण बना पवित्रता का भाव खत्म हो जाएगा|इसी तरह का प्रतिबंध सिविल सेवा के अधिकारियों के लिये भी होना चाहिए |' नैयरजी, क्या आप यह कहना चाहते हैं कि पवित्रता का जो भाव सेना के रिटायर्ड अधिकारियों में सेना से जुडे रहने के कारण बना होता है, उस पवित्रता की आवश्यक्ता आज की राज्नीति मे नही है ? मेरे अनुमान से आज उसी पवित्रता के भाव की तो अवश्यक्ता आन पडी है जो सेना अथवा सिविल सेवा के अधिकारियों मे विद्यमान रहती है| क्या विदेशों में पड. कर लौटे विरासत मे मिली सत्ता के सुख मे डूबे उन तथाकथित नवागंतुक राजनीतिकारों के भरोसे देश को छोड देना उचित है जो एअरपोर्ट से सीधे संसद भवन में विराजमान हो गए हों और अपनी कुर्सी पर बैठने के बाद अपने पूर्व राजनीतिकार अभिभावकों से राजनीति के पाठ सीख रहे हों? नैयरजी, यह देश आज की इन विषम परिस्थितियों मे, जब कि राष्ट्र की सर्वोच्च सत्ता पर भ्रष्टाचार के आरोप आरहे हैं,आप जैसे उन तमाम वरिष्ठ बुद्धिजीवियों कि ओर की दिग्दर्शक के भाव से देख रहा है,जिन्होंने समय-समय पर अपनी लेखनी से राष्ट्र के इन भग्य नियंताओं को चेताया है| |